चाईबासा। पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद ईचा-खरकई बांध विरोधी संघ कोल्हान के अध्यक्ष वीरसिंह बिरुली ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के जिला नेतृत्व और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों द्वारा शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने के बावजूद उन्हें और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
रविवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में वीरसिंह बिरुली ने कहा कि पूर्वजों के सम्मान और आदिवासी समाज के अधिकारों को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों ने शांतिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया था। इसके बावजूद प्रशासन ने कथित तौर पर सत्ता पक्ष के दबाव में कार्रवाई करते हुए उन्हें समेत 18 लोगों को हिरासत में लिया। उन्होंने बताया कि देर रात करीब 12 बजे सभी को रिहा कर दिया गया।
बिरुली ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करने वालों को हिरासत में लेना संविधान के अनुच्छेद-19 में मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने पर भी लोगों को हिरासत में लिया जाएगा, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने झामुमो जिला नेतृत्व पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कोल्हान के वीर शहीदों की उपेक्षा कर पार्टी की ओर से शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका आरोप है कि झामुमो जिलाध्यक्ष सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल कर प्रतिमा स्थापना करवाना चाहते हैं। बिरुली ने कहा कि यदि वास्तव में सामाजिक समन्वय की भावना होती, तो विरोध कर रहे संगठनों से पहले संवाद किया जाता।
वीरसिंह बिरुली ने कहा कि कोल्हान की धरती ने कभी अन्याय या तानाशाही को स्वीकार नहीं किया है और आगे भी समाज अपने स्वाभिमान एवं शहीदों के सम्मान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में संघर्ष जारी रखेगा।
सामाजिक संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि राज्य सरकार अपने ही राज्य के अमर शहीदों को सम्मान नहीं दे पा रही है, तो “अबुआ सरकार” का नारा केवल दिखावा बनकर रह गया है।
नोट: यह खबर संबंधित सामाजिक संगठनों और वीरसिंह बिरुली द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति एवं लगाए गए आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों पर झामुमो या जिला प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।








