Adityapur: गांधी जयंती पर नगर निगम का ‘स्वच्छता महाकुंभ’ या अफसरशाही का तमाशा? मेयर-डिप्टी मेयर को पूछा तक नहीं, 35 में से सिर्फ 3 पार्षद पहुंचे

आदित्यपुर: गांधी जयंती के पावन मौके पर जब पूरा देश बापू के आदर्शों को याद कर रहा था, तब आदित्यपुर नगर निगम में अफसरशाही और चुने हुए जनप्रतिनिधियों के बीच की गहरी खाई खुलकर सरेआम आ गई।

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मौका था ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ के तहत ऑटो क्लस्टर में आयोजित भव्य कार्यक्रम का, लेकिन इस सरकारी जलसे ने स्वच्छता की सीख से ज्यादा नगर निगम के भीतर मचे आंतरिक घमासान की बदबू फैला दी।

​सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि बनकर दीप प्रज्वलित किया। स्कूली बच्चों ने चित्रकला, भाषण, क्विज और ‘वेस्ट टू आर्ट’ में कमाल का हुनर दिखाया। मंच पर नगर आयुक्त एजाज अनवर, अपर नगर आयुक्त अमित कुमार और कार्यपालक अभियंता पंकज झा डटकर मौजूद रहे। बच्चों को प्रशस्ति पत्र भी बांटे गए, मगर इस चमक-दमक के पीछे की जमीनी हकीकत बेहद चौंकाने वाली रही।

​हैरानी की बात यह रही कि शहर के प्रथम नागरिक यानी मेयर संजय सरदार और डिप्टी मेयर अंकुर सिंह को कार्यक्रम की भनक तक नहीं लगने दी गई। 35 वार्ड पार्षदों वाले विशाल निगम से महज तीन पार्षद—अंजू सिंह, नीतू शर्मा और डॉ. नथुनी सिंह—ही कार्यक्रम में नजर आए। बाकी 32 जनप्रतिनिधियों के हिस्से न कोई बुलावा आया, न कोई सूचना।

​बोर्ड गठित होने के बावजूद जनप्रतिनिधियों की इस खुली अनदेखी पर मेयर संजय सरदार ने तल्ख लहजे में कहा कि निमंत्रण तो दूर, अफसरों ने एक फोन तक करना गवारा नहीं समझा, जो बेहद निंदनीय है। वहीं डिप्टी मेयर अंकुर सिंह ने भी दो टूक कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को दरकिनार करना गंभीर लापरवाही है। अब आदित्यपुर की गलियों से लेकर राजनीतिक चौपालों तक यही चर्चा गर्म है—क्या नगर निगम जनता के चुने प्रतिनिधियों से चलेगा या अफसरों की मर्जी से?

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