सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा धड़ल्ले से जारी, सीओ और थाना प्रभारी के आदेश का कोई मोल नही

Chaibasa (चाईबासा): सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा का खेल धड़ल्ले से चल रहा है. चाहे वो शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण क्षेत्र. ऐसा ही मामला कोचड़ा गाँव में देखने को मिल रहा है. जंहा सरकारी जमीन पर अबैध कब्जा करने वाले मस्त व सरकारी अधिकारी पस्त नजर आ रहे हैं.

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सरकारी जमीन कब्जा करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. उल्लेखनीय है कि सरकारी जमीन जिसका खाता संख्या 02 तथा प्लाट संख्या 1007 पर मंदिर की आड़ में गिरिजा प्रसाद, पिता यदुमणी कुम्हार,सुशान्त प्रधान पिता जितेंद्र प्रधान, सूरज प्रधान पिता यशवंत प्रधान सभी के गाँव कोचड़ा थाना हाटगम्हारिया के द्वारा जबरन कब्जा किया जा रहा है.

पीढ़ मानकी और ग्रामीणों ने दिया ज्ञापन

इस सम्बन्ध में सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिये पीढ़ मानकी गणेश चंद्र सिंकु तथा ग्रामीण मुण्डा प्रबीर बेहरा ने 63 जनता के हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन 5 सितंबर को उपायुक्त प०सिंहभूम, अपर उपायुक्त पश्चिमी सिंहभूम, भूमि उपसमाहर्ता, कोल्हान अधीक्षक पश्चिमी सिंहभूम व अंचल अधिकारी हाटगम्हारिया को ज्ञापन सौंपा गया है.

अंचल अधिकारी ने नहीं लिया संज्ञान

ज्ञापन में कहा गया है कि ज्ञापन दिये जाने के पूर्व इस संबन्ध में अंचल अधिकारी हाटगम्हारिया को मानकी एवं मुण्डा के द्वारा मौखिक सूचना दिया गया था. लेकिन अंचल अधिकारी के द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया गया. अंचल अधिकारी के द्वारा कहा गया कि लिखित आवेदन देने के बाद ही कारवाई किया जा सकता है.

सीओ थाना प्रभारी के आदेश का कोई मोल नही

जब इस संबंध में समाचार प्रकाशित हुआ तब जाकर अंचल अधिकारी और थाना प्रभारी हाटगम्हारिया हरकत में आये. दोनों अधिकारियों ने निर्माण स्थल आकर आनन फानन में निर्माण कार्य बंद करा दिया गया था. इसके बावजूद कब्जा करने वालों ने 18 अगस्त से पुनः निर्माण कार्य शुरु कर दिया है. मानो सीओ और थाना प्रभारी के आदेश का कोई मोल (वैल्यू) नही है. समाचार लिखे जाने तक द्रुत गति से अवैध निर्माण कार्य जारी है. अवैध कब्जा वालों का हौसला क्यों बुलंद है. यह जाँच का विषय है.

सीओ का संज्ञान नही लेना कई प्रश्न करता है खड़ा

पीढ़ मानकी गणेश चंद्र सिंकु ने कहा है कि अंचल अधिकारी को बार बार कहने पर भी कोई सुध नहीं लिया गया. अंचल अधिकारी का संज्ञान नहीं लेना कई प्रकार के प्रश्न खड़ा करती है. अंचल अधिकारी की भूमिका पर संदेह होना स्वभाविक हो जाता है. अधिकारियों की चुप्पी ने यहाँ के जनता को आंदोलित कर दिया है. सरकारी जमीन को जल्द कब्जा मुक्त नहीं कराया जाता है तो गाँव में शान्ति भंग होने की संभावना है.

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