सरायकेला-खरसावां: जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, सरायकेला-खरसावां ने ट्रेन के अत्यधिक विलंब के मामले में दक्षिण-पूर्व रेलवे के खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए यात्री को 60 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि बिना उचित कारण के ट्रेन का लंबी अवधि तक विलंबित होना रेलवे की सेवा में कमी (Deficiency in Service) है।
मामले के अनुसार आदित्यपुर निवासी संजय कुमार ने 13 अक्टूबर 2024 को टाटानगर से संबलपुर जाने के लिए आईस्पात एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 22861) में आरक्षित टिकट कराया था। ट्रेन को सुबह 10:18 बजे टाटानगर से रवाना होकर दोपहर 3:50 बजे संबलपुर पहुंचना था, लेकिन यह अपने निर्धारित समय से 317 मिनट (5 घंटे 17 मिनट) की देरी से गंतव्य पर पहुंची। इस कारण यात्री को मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
इसके बाद संजय कुमार ने रेलवे से 2.50 लाख रुपये क्षतिपूर्ति की मांग करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया। रेलवे ने अपने जवाब में आयोग के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामला रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के दायरे में आता है, लेकिन सुनवाई के दौरान ट्रेन के विलंब का कोई ठोस कारण या दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।
आयोग ने अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय के Northern Western Railway बनाम Sanjay Shukla (SLP (C) No. 13288/2021) मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि यात्रियों का समय अत्यंत मूल्यवान है और यदि रेलवे विलंब का उचित एवं अपरिहार्य कारण साबित नहीं कर पाता है तो इसे सेवा में कमी माना जाएगा।
आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह तथा सदस्य प्रदीप कुमार मिश्रा और संजू शाही की पीठ ने रेलवे को परिवादी को 50 हजार रुपये मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना तथा 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में, कुल 60 हजार रुपये का भुगतान 45 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया है। आदेश का पालन नहीं होने पर पूरी राशि पर आदेश की तिथि से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।
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