Chaibasa (चाईबासा) : पश्चिम सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र को अब नई पहचान मिलने वाली है। लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों के कारण चर्चा में रहने वाला यह इलाका अब पर्यटन के नक्शे पर उभरने की तैयारी में है। राज्य सरकार सारंडा की खूबसूरत वादियों में बसे मेघाहातूबुरू को बड़े ईको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने जा रही है।

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पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि मेघाहातूबुरू में लगभग छह एकड़ जमीन चिन्हित की गई है, जहां प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप ईको रिजॉर्ट और आधुनिक पर्यटन सुविधाएं तैयार की जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्राकृतिक सौंदर्य को बिना नुकसान पहुंचाए पर्यटन को बढ़ावा देना है।

मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क, पर्यटन और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर काम कर रही है। पहले इस परियोजना के लिए सेल से सहयोग मांगा गया था, लेकिन अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के बाद राज्य सरकार ने खुद आगे बढ़कर योजना को शुरू करने का फैसला लिया।
उन्होंने कहा कि झारखंड पर्यटन विकास निगम के माध्यम से यहां विकास कार्य कराया जाएगा। पर्यटकों के ठहरने, घूमने और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने के लिए बेहतर व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा ताकि बाहरी पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी न हो।

मंत्री ने बताया कि मेघाहातूबुरू नाम अपने आप में इस जगह की खासियत बताता है। स्थानीय भाषा में ‘मेघ’ का मतलब बादल, ‘हातु’ यानी गांव और ‘बुरू’ का अर्थ पहाड़ होता है। यानी “बादलों के गांव वाला पहाड़”। यह इलाका साल के कई महीनों तक बादलों से घिरा रहता है। घने साल जंगल, ठंडी हवाएं और पहाड़ियों के बीच तैरते बादल इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं।
सरकार की इस पहल से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
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