गुवा/बोलानी: सेल के सेंट्रल माइनिंग एंड लॉजिस्टिक्स ऑर्गेनाइजेशन (CMLO) अंतर्गत ओडिशा ग्रुप ऑफ माइंस की बोलानी लौह अयस्क खदान में शनिवार को 11 केवी विद्युत लाइन की मरम्मत के दौरान बड़ा हादसा हो गया। विद्युत करंट की चपेट में आने से दो संविदा श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए। दोनों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए भुवनेश्वर रेफर किया गया है।
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घायलों की पहचान दीपक नायक (19), निवासी मणि बस्ती, बोलानी और बबलू मुंडा (25), निवासी शांतिनगर, के रूप में हुई है। दोनों बीएलएस एंटरप्राइजेज के अधीन संविदा श्रमिक के रूप में कार्यरत थे।
मरम्मत के दौरान आया करंट
जानकारी के अनुसार, बोलानी खदान के सीबीआरएस क्षेत्र में 11 केवी विद्युत लाइन के रखरखाव के लिए 10 से अधिक श्रमिकों की टीम काम कर रही थी। इसी दौरान दीपक नायक और बबलू मुंडा विद्युत पोल पर चढ़कर मरम्मत कार्य कर रहे थे। तभी अचानक लाइन में बिजली प्रवाहित हो गई, जिससे दोनों गंभीर रूप से झुलस गए।
सहकर्मियों ने तत्काल दोनों को नीचे उतारकर बोलानी खदान अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें भुवनेश्वर के उच्चस्तरीय अस्पताल रेफर कर दिया।
एम्बुलेंस में देरी का आरोप, अस्पताल में नाराजगी
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और श्रमिकों में नाराजगी फैल गई। आरोप लगाया गया कि गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे इलाज में देरी हुई। इसको लेकर अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल भी बन गया और लोगों ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
दुर्घटना के बाद खदान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। श्रमिकों का कहना है कि 11 केवी जैसी उच्च वोल्टेज लाइन पर कार्य शुरू करने से पहले लाइन का पूर्ण शटडाउन, आइसोलेशन, परमिट-टू-वर्क (PTW) और अन्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए था। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया जाता तो इस हादसे को टाला जा सकता था।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
केंदूझर माइनिंग वर्कर्स यूनियन (सीटू) के उपाध्यक्ष लखनलाल ठाकुर ने घटना पर गहरी चिंता जताते हुए सुरक्षा में लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सेल जैसी महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी में सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने दुर्घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं संबंधित एजेंसी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की।
फिलहाल दुर्घटना के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा तकनीकी खराबी, मानवीय भूल या सुरक्षा प्रोटोकॉल में चूक के कारण हुआ।







