Ranchi (रांची) : झारखंड पुलिस ने एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता बताया है। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि मिसिर बेसरा सारंडा क्षेत्र से हथियार लेकर पारसनाथ की ओर जा रहा था, जहां उसकी योजना कमजोर पड़ चुके भाकपा (माओवादी) संगठन को फिर से सक्रिय करने की थी।
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झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्र ने बताया कि मिसिर बेसरा लंबे समय से संगठन के बिखरे कैडरों को दोबारा एकजुट करने, नए सदस्यों की भर्ती करने और हथियारों की आपूर्ति का नेटवर्क तैयार करने में जुटा था। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और लगातार चलाए जा रहे अभियान के कारण उसकी योजना सफल होने से पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
डीजीपी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में झारखंड पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और सरकार की आत्मसमर्पण नीति के कारण माओवादी संगठन को भारी नुकसान पहुंचा है। कई बड़े नक्सली मारे गए, गिरफ्तार हुए या मुख्यधारा में लौट आए हैं। ऐसे हालात में मिसिर बेसरा संगठन को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा था।
उन्होंने बताया कि मिसिर बेसरा के खिलाफ हत्या, सुरक्षाबलों पर हमले, विस्फोट, लेवी वसूली, हथियार लूट और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। वह झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में सक्रिय रह चुका है तथा संगठन के शीर्ष कमांडरों में उसकी गिनती होती रही है।
डीजीपी ने स्पष्ट किया कि उसके खिलाफ दर्ज मामलों में स्पीडी ट्रायल चलाया जाएगा ताकि उसे जल्द से जल्द कड़ी सजा दिलाई जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल वांछित नक्सलियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि न्यायालय के माध्यम से उन्हें सजा दिलाना भी है। साथ ही जेल में बंद बड़े नक्सलियों की गतिविधियों पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी।
पुलिस अब मिसिर बेसरा से पूछताछ के आधार पर उसके सहयोगियों, हथियारों के ठिकानों, वित्तीय नेटवर्क और संगठन को दोबारा खड़ा करने की पूरी रणनीति का पता लगाने में जुटी है। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है और राज्य में नक्सल उन्मूलन अभियान को नई मजबूती मिलेगी।








