Chandil Dalma Sendra Parv ​दलमा वन्यजीव अभयारण्य में परंपरा और संरक्षण का संगम: वन विभाग का दावा ,बिना शिकार संपन्न हुआ सेंदरा पर्व

दलमा वन्य प्राणी आश्रणी

सरायकेला: दलमा वन्य प्राणी आश्रणी में इस वर्ष ‘सेंदरा पर्व’ (पारंपरिक शिकार उत्सव) वन्यजीवों के लिए सुरक्षित रहा। सरायकेला के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर सबा आलम ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि वन विभाग की सक्रियता और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से इस बार शिकार की घटनाओं पर पूर्णतः लगाम लगाई गई है।

Saraikela Dalma Shikar Parv: वन विभाग की जागरूकता का असर ,शिकार पर्व में कम संख्या में पहुंचे सेंदरा वीर

सेंदरा पर्व

​सामुदायिक भागीदारी से मिली सफलता

डीएफओ सबा आलम ने बताया कि 27 तारीख को आयोजित होने वाले इस पर्व के लिए वन विभाग ने महीनों पहले से रणनीति तैयार की थी। विभाग ने क्षेत्र के 85 गांवों की ‘ग्राम वन प्रबंधन समितियों’ और ‘इको विकास समितियों’ के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाया। डीएफओ के अनुसार, ग्रामीणों ने न केवल शिकार न करने का संकल्प लिया, बल्कि वे वन्यजीवों के रक्षक के रूप में भी सामने आए।

सेंदरा पर्व

​रोजगार और जागरूकता का प्रभाव

सबा आलम ने स्पष्ट किया कि दलमा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होने से ग्रामीणों की जंगल पर निर्भरता और शिकार की प्रवृत्ति में कमी आई है। उन्होंने कहा यह हमारे लिए गर्व की बात है कि अभी तक शिकार की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। शिकारी बहुत कम संख्या में आए और जो आए उन्हें भी समझाकर वापस कर दिया गया। लोग अब वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक हो रहे हैं।”

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